धर, कर्म और मज़हब की नफरत
क्यूँ हैं?
हिन्दू और मुस्लिम में आपसी नफरत क्यूँ हैं?
आस्पतालो में अक्सर ये किआ जाता हैं.
की खून बिना मज़हब देखे दिया जाता हैं.
छूत छात और तातसूप की लानत क्यूँ हैं?
जाती भेद और उच्च नीच की फिदरत क्यूँ हैं?
एक जैसे दीखते हैं एकसा हम खाते हैं
फिर क्यूँ कुछ स्वर्ण, कुछ हरिजन कहलाते
हैं?
जब खुद खुदा हमें एक जैसा बनाता हैं
तो इंसा ही क्यूँ इंसान से कतराता हैं?
एक सी धुप हमे छूती हैं, बरसता पानी हैं
एक सा खून हैं हमारा एक सी कहानी हैं
एक ही हवा हैं जिसको लेकर हम जिंदा हैं
फिर भी इंसा इंसा से शर्मिंदा हैं?
ली :- दीपेन उपाध्याय
ता :- २ अगस्त २०१४
समय :- रात के ११:२५
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